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Showing posts from October, 2025

गर्मी के टाइम कोनशे share की प्राईस बढती है और क्यो

गर्मी के टाइम कोनशे share की प्राईस बढती है और क्यो गर्मी (summer) के टाइम कुछ खास sectors के shares की कीमतें बढ़ने का ट्रेंड होता है। इसका reason demand, मौसम और business cycle से जुड़ा होता है। मुख्य रूप से: 1. Electricity / Power Sector (बिजली कंपनियाँ)  गर्मी में बिजली की demand बहुत बढ़ती है (AC, fans, cooling systems के कारण)।  Companies जैसे NTPC, Tata Power, Power Grid के shares की कीमत बढ़ सकती है। 2. Cooling & Consumer Durables (AC, Refrigerator बनाने वाली कंपनियाँ) गर्मी में AC, fridge, water cooler की बिक्री बढ़ती है। Companies जैसे  Voltas, Blue Star, Whirlpool, Havells के shares summer में demand boost के कारण बढ़ सकते हैं। 3.Beverages & Cold Drinks (Thanda drinks / Water bottles)  Soft drinks और packaged water की demand बढ़ती है।  Companies जैसे PepsiCo India, Coca-Cola India के shares को short-term boost मिल सकता है। 4. Agriculture / Fertilizers (कृषि / Fertilizer companies) गर्मी में irrigation और cropping season के लिए fert...

Rbi policy का असर बँकिंग शेअर पे होता है क्या

Rbi policy का असर बँकिंग शेअर पे होता है क्या  RBI की पॉलिसी का सीधा असर बैंकिंग शेयरों पर होता है। ये असर इसलिए होता है क्योंकि RBI की नीतियाँ बैंकिंग सेक्टर की लोन देने की क्षमता, ब्याज दर, और मुनाफ़े को प्रभावित करती हैं।  अगर RBI ब्याज दरें बढ़ाता है (repo rate बढ़ाता है) बैंकों के लिए लोन महंगा हो जाता है  लोन की डिमांड घटती है  बैंकिंग शेयरों पर नकारात्मक असर पड़ता है।  अगर RBI ब्याज दरें घटाता है लोन सस्ता होता है  लोन की डिमांड बढ़ती है बैंक का मुनाफ़ा और शेयर प्राइस बढ़ सकते हैं।  साथ ही RBI की liquidity policy, CRR, SLR और inflation control steps भी बैंकिंग सेक्टर के sentiment को बदल देते हैं। इसलिए निवेशक हमेशा RBI की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) पर नज़र रखते हैं क्योंकि ये बैंकिंग स्टॉक्स की दिशा तय करती है। 1. लिक्विडिटी (Liquidity)    अगर RBI सिस्टम में ज़्यादा पैसा डालता है (liquidity बढ़ाता है), तो बैंकों के पास लोन देने के लिए ज़्यादा पैसा होता है। इससे बैंक का बिज़नेस बढ़ता है और शेयरों पर positive effect आता ह...

FII foreign investors भारत मे शेअर मार्केट मे इन्व्हेस्टमेंट करते समय MSCI index, FTSE index, LSE index क्यो देखतें है

FII foreign investors  भारत मे शेअर मार्केट मे इन्व्हेस्टमेंट करते समय MSCI index, FTSE index, LSE   index क्यो  देखतें है  जब Foreign Institutional Investors (FII) भारत में निवेश करते हैं, तो वो MSCI, FTSE, और LSE जैसे इंडेक्स इसलिए देखते हैं क्योंकि ये वैश्विक मानक (global benchmarks) हैं।  1. MSCI Index (Morgan Stanley Capital International)  ये दुनिया के अलग-अलग देशों के शेयर मार्केट को ट्रैक करता है।    अगर भारत के ज़्यादा शेयर MSCI India Index में शामिल होते हैं, तो FIIs ज़्यादा पैसा भारत में लगाते हैं क्योंकि उनके फंड को इस इंडेक्स को फॉलो करना होता है।    मतलब — MSCI inclusion = ज़्यादा विदेशी पैसा भारत में। 2. FTSE Index (Financial Times Stock Exchange)    ये भी ग्लोबल इंडेक्स है जो कई देशों के मार्केट को ट्रैक करता है।   FII देखता है कि भारत का मार्केट FTSE इंडेक्स में कितना वज़न रखता है, ताकि वो उसी हिसाब से निवेश कर सके। 3. LSE (London Stock Exchange) Index    यहाँ पर कई विदेशी फंड और...

सोना, इक्विटी और प्रॉपर्टी, पिछले दशक में किसने बेहतर रिटर्न दिया?

सोना, इक्विटी और प्रॉपर्टी, पिछले दशक में किसने बेहतर रिटर्न दिया? पिछले दशक में, इक्विटी (शेयर) ने सोने और प्रॉपर्टी को पछाड़कर सबसे अच्छा रिटर्न दिया। इक्विटी: भारत की मज़बूत बाज़ार वृद्धि के कारण लगभग 12-15% औसत वार्षिक रिटर्न दिया। सोना: अनिश्चित समय में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन औसतन लगभग 7-8% प्रति वर्ष। प्रॉपर्टी: कई शहरों में ऊँची कीमतों और कम माँग के कारण, धीमी गति से, लगभग 5-6% प्रति वर्ष की वृद्धि हुई। सरल शब्दों में: शेयरों ने सबसे ज़्यादा पैसा कमाया, सोना सुरक्षित रहा, और प्रॉपर्टी स्थिर लेकिन धीमी रही।

इलेक्ट्रिसिटी रेट बढणे से कोनसे कंपनी शेअर को फायदा होता है और क्यो

इलेक्ट्रिसिटी रेट बढणे से कोनसे कंपनी शेअर को फायदा होता है और क्यो  जब बिजली के रेट बढ़ते हैं, तो कुछ कंपनियों को इसका सीधा फायदा होता है — खासकर पावर प्रोड्यूस करने वाली कंपनियों को। 1. पावर जनरेशन कंपनियाँ (Power Generation Companies) जैसे NTPC, Tata Power, Adani Power, JSW Energy आदि। इनका फायदा इसलिए होता है क्योंकि जब बिजली महंगी बिकती है, तो इनकी कमाई (revenue) बढ़ जाती है। 2. कोयला या एनर्जी से जुड़ी कंपनियाँ (Coal & Energy Companies) जैसे Coal India, क्योंकि बिजली बनाने के लिए कोयले की मांग बढ़ जाती है, तो इनका सेल बढ़ता है। 3. रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियाँ (Renewable Energy Companies) जैसे Adani Green, Suzlon, Inox Wind – बिजली महंगी होने पर ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ता है, जिससे इन्हें फायदा होता है।

Crude oil (कच्चा तेल) के दाम बढ़ने से कुछ कंपनियों को फायदा होता है।

Crude oil (कच्चा तेल) के दाम बढ़ने से कुछ कंपनियों को नुकसान होता है, लेकिन कुछ को फायदा भी होता है। चलिए आसान भाषा में समझते हैं   जिन कंपनियों को फायदा होता है: 1. ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनियाँ (तेल खोजने और निकालने वाली)   जैसे: ONGC, Oil India, Reliance Industries (E&P segment)   क्यों फायदा होता है:      ये कंपनियाँ जमीन से कच्चा तेल निकालती हैं। जब क्रूड का रेट बढ़ता है, तो इन्हें अपने तेल के लिए ज्यादा दाम मिलते हैं।  यानी जितना तेल बेचेंगी, उतना ज्यादा मुनाफा। 2. Oilfield Service Providers (तेल निकालने में मदद करने वाली कंपनियाँ)   जैसे: Halliburton, Schlumberger (वैश्विक), भारत में कुछ छोटे सर्विस प्रोवाइडर   क्यों फायदा:      जब तेल के दाम बढ़ते हैं तो बड़ी कंपनियाँ तेल निकालने का काम बढ़ा देती हैं, जिससे इन सर्विस कंपनियों को भी ज्यादा काम और पैसा मिलता है। जिन्हें नुकसान होता है (जानकारी के लिए): Oil Refining कंपनियाँ (जैसे IOC, BPCL, HPCL)  क्योंकि इन्हें तेल महंगा पड़ता है। Paint, Plastic, Ty...

जब क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमत बढ़ती है

जब क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमत बढ़ती है, तो कुछ कंपनियों को सीधा फ़ायदा होता है। कारण ये है कि उनकी आय और मुनाफा तेल के दाम से जुड़ा होता है।   किन कंपनियों को फायदा होता है? 1. ऑयल एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन कंपनियां  जैसे: ONGC, Oil India, Reliance (oil & gas division), Vedanta   क्यों फायदा होता है?      क्योंकि ये कंपनियां तेल और गैस की खुदाई करके बेचती हैं। अगर क्रूड महँगा बिकेगा तो इन्हें ज़्यादा दाम मिलेंगे और मुनाफा बढ़ेगा। 2. ऑयल रिफाइनिंग कंपनियां (कुछ मामलों में)  जैसे: Reliance Industries (refinery), Chennai Petroleum  क्यों फायदा हो सकता है?  अगर सरकार सब्सिडी या टैक्स में राहत देती है और ये कंपनियां महंगे दाम पर प्रोडक्ट बेच पाती हैं, तो मार्जिन बढ़ सकता है। 3. एनर्जी सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां  जो ड्रिलिंग, ऑयलफील्ड सर्विसेस या मशीनरी देती हैं।  क्यों फायदा होता है?    तेल की कीमत बढ़ने पर एक्सप्लोरेशन और ड्रिलिंग प्रोजेक्ट्स बढ़ते हैं, जिससे इनकी डिमांड भी बढ़ती है।

जब क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमत कम होती है तो इसका असर कई सेक्टर्स पे पड़ता है:

जब क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमत कम होती है तो भारत जैसी ऑयल इम्पोर्ट करने वाली अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा मिलता है। इसका असर कई सेक्टर्स और कंपनियों पर पड़ता है:  1. एविएशन कंपनियां (Indigo, SpiceJet, Air India आदि)  हवाई जहाज़ का सबसे बड़ा खर्च ATF (Aviation Turbine Fuel) होता है, जो क्रूड से बनता है। क्रूड सस्ता = ईंधन सस्ता = फ्लाइट का खर्च घटा = मुनाफा बढ़ा। इसलिए एविएशन शेयर चढ़ते हैं। 2. पेंट्स और केमिकल कंपनियां (Asian Paints, Berger Paints, Pidilite आदि)  पेंट और केमिकल प्रोडक्ट्स की कच्ची सामग्री (raw material) पेट्रोलियम से बनती है। क्रूड सस्ता = कच्चा माल सस्ता = प्रॉफिट मार्जिन ज्यादा।  इस वजह से इन कंपनियों के शेयर ऊपर जाते हैं। 3. ऑटोमोबाइल कंपनियां (Maruti, Tata Motors, M&M आदि) जब तेल सस्ता होता है तो लोगों का ईंधन खर्च घटता है  कार, बाइक की डिमांड बढ़ती है।  इससे ऑटो सेक्टर को फायदा होता है।  4. लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट कंपनियां (Container Corp, Blue Dart, VRL Logistics आदि) ट्रक, बस, ट्रेन में डीज़ल का खर्च बड़ा हिस...