Rbi policy का असर बँकिंग शेअर पे होता है क्या
RBI की पॉलिसी का सीधा असर बैंकिंग शेयरों पर होता है।
ये असर इसलिए होता है क्योंकि RBI की नीतियाँ बैंकिंग सेक्टर की लोन देने की क्षमता, ब्याज दर, और मुनाफ़े को प्रभावित करती हैं।
अगर RBI ब्याज दरें बढ़ाता है (repo rate बढ़ाता है) बैंकों के लिए लोन महंगा हो जाता है लोन की डिमांड घटती है बैंकिंग शेयरों पर नकारात्मक असर पड़ता है।
अगर RBI ब्याज दरें घटाता है लोन सस्ता होता है लोन की डिमांड बढ़ती है बैंक का मुनाफ़ा और शेयर प्राइस बढ़ सकते हैं।
साथ ही RBI की liquidity policy, CRR, SLR और inflation control steps भी बैंकिंग सेक्टर के sentiment को बदल देते हैं।
इसलिए निवेशक हमेशा RBI की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) पर नज़र रखते हैं क्योंकि ये बैंकिंग स्टॉक्स की दिशा तय करती है।
1. लिक्विडिटी (Liquidity)
अगर RBI सिस्टम में ज़्यादा पैसा डालता है (liquidity बढ़ाता है), तो बैंकों के पास लोन देने के लिए ज़्यादा पैसा होता है। इससे बैंक का बिज़नेस बढ़ता है और शेयरों पर positive effect आता है।
2. CRR और SLR बदलाव
CRR (Cash Reserve Ratio) बढ़ने से बैंकों को ज़्यादा पैसा RBI के पास रखना पड़ता है, जिससे लोन देने की क्षमता घटती है शेयरों पर negative impact।
SLR (Statutory Liquidity Ratio) घटाने से बैंक ज़्यादा लोन दे पाते हैं positive impact।
3. Inflation (महँगाई) पर कदम
अगर RBI महँगाई कम करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाता है, तो short term में बैंक शेयर गिर सकते हैं।
लेकिन long term में जब inflation कंट्रोल में आता है, तो बैंकिंग सेक्टर स्थिर और मज़बूत होता है।
4. RBI का टोन (Policy outlook)
अगर RBI “growth supportive” रहता है, यानी ब्याज दरें स्थिर या घटाने की बात करता है, तो बैंकिंग स्टॉक्स में रैली (rally) देखी जाती है।
5. NPA (Bad loans) पर असर
RBI की निगरानी और नियम (जैसे provisioning norms) भी बैंकों के NPA और profit को प्रभावित करते हैं, जिससे शेयर प्राइस पर असर पड़ता है।
जब RBI की पॉलिसी “friendly” होती है, बैंकिंग शेयर चढ़ते हैं।
जब पॉलिसी “कड़क” या “inflation control” वाली होती है, तो बैंकिंग शेयर दबाव में आ जाते हैं।
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