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Showing posts from August, 2025

पावर सेक्टर के शेयर क्यों बढ़ते हैं?

पावर सेक्टर के शेयर क्यों बढ़ते हैं?  1. बिजली की मांग बढ़ना  गर्मी/सर्दी में एयर कंडीशनर, हीटर और औद्योगिक उत्पादन से बिजली की खपत तेज़ी से बढ़ती है। EV (इलेक्ट्रिक वाहन), डेटा सेंटर और टेक्नोलॉजी कंपनियों को भी अधिक बिजली चाहिए। जितनी अधिक मांग, उतनी अधिक कमाई = शेयर प्राइस ऊपर। 2. सरकारी नीतियाँ और योजनाएँ सौर, पवन, जल जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी व प्रोत्साहन।  नई ट्रांसमिशन लाइन्स, स्मार्ट ग्रिड और EV चार्जिंग स्टेशन की घोषणाएँ।  पावर टैरिफ (बिजली दर) में बदलाव जो कंपनियों को स्थिर आमदनी देता है।  सरकार का समर्थन = निवेशकों का भरोसा = शेयर चढ़ते हैं। 3. नई परियोजनाएँ और निवेश कंपनियाँ नए पावर प्लांट (सोलर, विंड, हाइड्रो, न्यूक्लियर) लगाती हैं। विदेशी निवेश या बड़े पैमाने पर कैपेसिटी बढ़ाना।  भविष्य की कमाई की संभावना बढ़ती है, शेयर ऊपर जाते हैं। 4. मजबूत वित्तीय नतीजे मुनाफ़ा (Profit) और बिक्री (Sales) में बढ़ोतरी। कर्ज़ कम होना या पुनर्गठन। नियमित डिविडेंड से निवेशकों का विश्वास बढ़ता है। अच्छे रिज़ल्ट = शेयर में तेजी।...

जब light production यानी लाइट निर्माण या LED लाइट्स की अधिक उत्पादन क्षमता बढ़ती है

जब  light production यानी लाइट निर्माण या LED लाइट्स की अधिक उत्पादन क्षमता बढ़ती है, तो अक्सर उनमें से Havells India जैसी प्रमुख कंपनियों के शेयरों में सुधार होता है—क्योंकि बढ़ी हुई उत्पादन क्षमता आम तौर पर बिक्री में वृद्धि और लागत में कमी को संकेत करती है।  जब light  उत्पादन बढ़ता है, तो Havells India के शेयर में सुधार देखने को मिलता है। यह इस कारण होता है कि कंपनी की लाइटिंग उत्पादों की मांग और उत्पादन क्षमता दोनों ही बढ़ते हैं।  उत्पादन क्षमता बढ़ने से कंपनी की संभावित बिक्री और मार्जिन बढ़ता है। इसके अलावा, सरकार की ऊर्जा-सक्षम लाइटिंग योजनाओं (जैसे UJALA) और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं से भी इस क्षेत्र में मांग बढ़ रही है, जो निवेशकों के दृष्टिकोण को पॉज़िटिव बनाती है।  भारत में LED लैम्प्स का बाज़ार तेजी से बढ़ रहा है। 2025 में यह लगभग USD 4.93 बिलियन था और 2030 तक यह बढ़कर USD 6.77 बिलियन होने की उम्मीद है। CAGR लगभग 6.5% है। सरकार की UJALA योजना के तहत LED बल्बों की संख्या तेजी से बढ़ी—2014 में यह केवल 0.3% थी, जो पांच साल में बढ़कर 46% हो गई।...

क्यों कुछ शेयर एक्सपायरी (Expiry) के दिन तेज़ी में रहते हैं?

क्यों कुछ शेयर एक्सपायरी (Expiry) के दिन तेज़ी में रहते हैं? 1. शॉर्ट कवरिंग (Short Covering)    जिन ट्रेडर्स ने शेयर को पहले बेचा (short sell) होता है, वे एक्सपायरी के दिन अपनी पोज़िशन बंद (cover) करने के लिए खरीदारी करते हैं। इससे शेयर अचानक ऊपर चला जाता है। 2. ऑप्शन राइटर्स का एडजस्टमेंट    जो लोग ऑप्शन बेचते हैं (Option Writers), उन्हें एक्सपायरी के दिन अपना घाटा बचाने के लिए शेयर या फ्यूचर्स में खरीद-बिक्री करनी पड़ती है। इसकी वजह से तेज़ मूवमेंट आता है। 3. ओपन इंटरेस्ट (OI) अनवाइंडिंग    जिन शेयरों में ज़्यादा फ्यूचर्स और ऑप्शन की पोज़िशन खुली होती है, वहां एक्सपायरी के दिन सब पोज़िशन बंद होने लगती है। इससे अचानक तेज़ी या गिरावट देखने को मिलती है। 4. स्पेक्युलेटिव ट्रेडिंग    एक्सपायरी वाले दिन छोटे-बड़े सभी ट्रेडर्स ज़्यादा वॉल्यूम में ट्रेड करते हैं। इस कारण कुछ स्टॉक्स में तेज़ी देखी जाती है। 5. इंडेक्स मैनेजमेंट    निफ्टी और बैंक निफ्टी के वज़नी शेयर (जैसे Reliance, HDFC Bank, Infosys) को बड़े प्लेयर्स कभी-कभी ऊपर-न...